
The Aman Times
उत्तराखंड ब्यूरो_
गंगा की पवित्रता से समझौता नहीं: डीएम सविन बंसल का चन्द्रेश्वर नाला क्षेत्र में औचक निरीक्षण
25 घरों के ड्रेन्स सीज, बिना शोधन गंदा पानी बहाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
देहरादून के ऋषिकेश से खबर हैं _
ऋषिकेश स्थित चन्द्रेश्वर नाले से गंगा नदी में बिना उपचारित गंदे पानी एवं ठोस कचरे के प्रवाह की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी श्री सविन बंसल ने बुधवार को क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गंगा की स्वच्छता और पवित्रता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए नाले में दूषित जल प्रवाहित कर रहे 25 आवासीय भवनों के पाइप-ड्रेन्स को तत्काल सीज करने के निर्देश नगर आयुक्त एवं जल संस्थान को दिए। डीएम ने कहा कि चाहे 07 विभागों के वरिष्ठ प्रतिष्ठान हों या निजी आवास, यदि बिना शोधन गंदा पानी गंगा में छोड़ा गया तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

तीन दिन में सीवरेज नेटवर्क से जोड़ने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी वार्ड-3 के गली-मोहल्लों में पैदल पहुंचे और नालियों, सीवरेज कनेक्शनों का जायजा लिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में सीवर कनेक्शन नहीं हैं, वहां तीन दिवस के भीतर नालियों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ा जाए।

एसटीपी क्षमता बढ़ाने के निर्देश, बनेगी विस्तृत कार्ययोजना
डीएम ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता वृद्धि के लिए शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंगा में मिलने वाले सभी नालों का जल पूरी तरह शोधन के बाद ही प्रवाहित किया जाएगा। चन्द्रेश्वर नाले की सफाई एवं शोधन को लेकर विस्तृत रिपोर्ट और कार्ययोजना तलब की गई है, जिसे सार्वजनिक भी किया जाएगा।

देश का पहला बहुमंजिला एसटीपी ऋषिकेश में
अधिकारियों ने बताया कि ऋषिकेश में 7.50 एमएलडी क्षमता का बहुमंजिला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत स्थापित किया गया है, जो अक्टूबर 2020 से संचालित है। यह एसटीपी श्मशान घाट नाला, चन्द्रेश्वर नगर नाला एवं ढालवाला नाले के शोधन के लिए बनाया गया है।
मानसून के दौरान ढालवाला नाले में जल प्रवाह अधिक होने से एसटीपी की क्षमता प्रभावित होती है। वर्तमान में ड्रोन सर्वे एवं घर-घर सर्वे के माध्यम से 502 परिवारों की पहचान की गई है, जिनमें से कई परिवारों द्वारा सीवेज एवं ग्रे-वॉटर सीधे नाले में छोड़ा जा रहा है। जल नमूनों की जांच एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला से कराई जा रही है।

सभी विभाग एक मंच पर
जिलाधिकारी ने नगर निगम, जल संस्थान, पेयजल निगम, सीवरेज अनुरक्षण इकाई, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं सिंचाई विभाग को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गंगा संरक्षण को लेकर एक साझा कार्ययोजना जल्द तैयार की जाएगी, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए गंगा को स्वच्छ और निर्मल रखा जा सके।

निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी ऋषिकेश योगेश मेहरा, नगर आयुक्त रामकुमार बिनवाल, सीओ पुलिस पूर्णिमा गर्ग सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।




