
The Aman Times
देहरादून ब्यूरो_
देहरादून में कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों पर रहेगी विशेष नजर, डोईवाला और कालसी रेड जोन में।
देहरादून/उत्तराखंड _
देहरादून जिले में कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों पर अब प्रशासन की विशेष नजर रहेगी। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और लिंगानुपात में सुधार के लिए कम लिंगानुपात वाले गांवों को चिह्नित कर रेड जोन बनाने के निर्देश दिए हैं।

शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को प्रत्येक गांव के पिछले पांच वर्षों के लिंगानुपात के आंकड़ों का विश्लेषण करने और असामान्य स्थिति वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी करने के निर्देश दिए।

बैठक में सामने आया कि वर्ष 2025-26 में उत्तराखंड का लिंगानुपात 939 के मुकाबले देहरादून का लिंगानुपात 927 रहा। हालांकि, इस वर्ष जिले का लिंगानुपात बढ़कर 937 दर्ज किया गया है।
डोईवाला और कालसी में सबसे कम लिंगानुपात
वर्ष 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार डोईवाला में 885 और कालसी में 887 लिंगानुपात दर्ज किया गया है। वहीं सहसपुर में 924, रायपुर में 949, विकासनगर में 1000 और चकराता में 1060 लिंगानुपात दर्ज किया गया।

कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ गर्भवती महिलाओं की प्रभावी ट्रैकिंग के निर्देश भी दिए गए हैं।
218 डायग्नोस्टिक केंद्रों की होगी नियमित निगरानी
जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जिले में संचालित सभी 218 डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। इन केंद्रों में कुल 420 अल्ट्रासाउंड मशीनें स्थापित हैं।
सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 117 केंद्रों का निरीक्षण किया गया है, जबकि सितंबर माह में ही 84 केंद्रों की जांच की गई। मानकों का उल्लंघन मिलने पर तीन केंद्रों की अल्ट्रासाउंड मशीनें सील की गई हैं।
भ्रूण लिंग जांच पर सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि भ्रूण के लिंग की जांच कराने या करने वालों के खिलाफ पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। प्रशासन का उद्देश्य अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण पर प्रभावी रोक लगाना और जिले में लिंगानुपात में सुधार करना है।

मानक पूरे होने पर ही मिलेगा नया पंजीकरण
बैठक में 10 नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण और 18 केंद्रों के नवीनीकरण के आवेदनों पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि अनुमति देने से पहले उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाण पत्र, एमडीडीए की एनओसी, अग्निशमन सुरक्षा प्रमाण पत्र और जैव चिकित्सा अपशिष्ट निस्तारण संबंधी अनुबंध की जांच अनिवार्य रूप से की जाए।
उन्होंने कहा कि निर्धारित मानक पूरे करने वाले केंद्रों को ही पंजीकरण अथवा नवीनीकरण की अनुमति दी जाएगी।



